BALASORE TRAIN ACCIDENT: कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट जिंदा मिले, चल रहा इलाज

भुवनेश्वर: ओडिशा के बालासोर में हुए दुखद तिहरे ट्रेन हादसे के तीन दिन बाद पता चला कि 2 जून को हुए भीषण हादसे का शिकार हुए कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट जीवित हैं और उनका इलाज चल रहा है. कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट गुणांधी मोहंती और सहायक लोको पायलट हजारी बेहरा को चोटें आई हैं और उनका भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है. दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) आदित्य कुमार चौधरी ने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर और खतरे से बाहर बताई गई है. उन्होंने यह भी बताया कि मालगाड़ी के गार्ड की हालत भी स्थिर है.

आदित्य कुमार चौधरी ने कहा कि लोको पायलट और सहायक लोको पायलट दोनों ने घटना के बारे में अपने बयान दिए हैं. रेलवे बोर्ड की सदस्य जया वर्मा सिन्हा ने पहले कहा था कि हरी झंडी मिलने के बाद पायलट लूप लाइन की ओर आगे बढ़ा. जया वर्मा ने नई दिल्ली में कहा, "हमने ड्राइवर से बात की थी और उसने पुष्टि की कि सिग्नल हरा था. हमारा स्टाफ समर्पित है और समर्पण के साथ काम करता है. सिग्नल के लाल होने पर न तो वह गुजरा था और न ही ओवरस्पीडिंग कर रहा था. ड्राइवर को गंभीर चोटें आईं. उसने कहा कि सिग्नल हरा था."

जया वर्मा के मुताबिक, डेटा रिकॉर्ड (सीलबंद रिकॉर्ड जो जांच का हिस्सा है) भी बताता है कि सिग्नल हरा था. दूसरा हर लोको में एक स्पीडोमीटर और चार्ट होता है जो गति को रिकॉर्ड करता है. स्पीडोमीटर ग्राफ को हटा दिया गया है और वह (ड्राइवर) अपनी अनुमेय गति सीमा में था. जया वर्मा ने कहा कि यह एक हाई-स्पीड सेक्शन (130 किमी प्रति घंटे की अनुमति) है और ट्रेन चालक 128 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चला रहा था. इस बीच रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त शैलेश कुमार पाठक ने दुर्घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि भारतीय रेलवे सुरक्षा के दक्षिण-पूर्वी सर्कल ने ट्रेन दुर्घटना की स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है.

शैलेश कुमार पाठक ने मीडियाकर्मियों से कहा, रेलवे सुरक्षा दक्षिण-पूर्वी सर्कल के आयुक्त ने अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है और जैसे ही रिपोर्ट पूरी हो जाएगी, हम विवरण साझा करेंगे. जांच पूरी होने के साथ कुछ भी कहना असंभव और सही नहीं है. संबंधित विकास में, जीआरपी ने बालासोर जीआरपी उप-निरीक्षक (एसआई) द्वारा दायर एक शिकायत के बाद आईपीसी की धारा 337, 338, 304-ए और 34 आईपीसी, 1980 और धारा 153, 154 और 175 रेलवे अधिनियम 1989 के तहत मामला दर्ज किया है. जीआरपी के पप्पू कुमार नाइक ने अपनी प्राथमिकी में रेलवे की ओर से लापरवाही का जिक्र किया है.

2023-06-05T15:50:26Z dg43tfdfdgfd